Wednesday, January 26, 2011

vijay rath

इस बार का गणतंत्र  दिवस  हर मायने में कुछ खास है  ,   जनता के सवालो का  देश के रहनुमाओ  के पास कोई जवाब नहीं है, चाहे  वह सवाल प्याज की  असमान छूती कीमतों के बरो में हो , या फिर  घोटालो के बरो में हो , या फिर देश के द्वारा अर्जित की गयी उपलब्धियों के बारो में हो, एक ही चीज  सबो में में सामान   है  और  वो है  सबका बढ़ना .
                                   हमारा देश  सही मायनो में विरोधाभासो का देश है ये इसी बात से जाहिर होती है की  १ लाख ७६ हज़ार के घोटालो के बावजूद  हम विश्व की  छठी सबसे  तेज प्रगति  करने वाला देश है .  अब  आंकड़ो  के खेल को समझे , देश की जीडीपी  विकास की दर ८.९%  जबकि  प्रति व्यक्ति आय  सिर्फ ४४७०० सालाना है, बेरोजगारी के बारे  बात करना  तो समय की ही बर्बादी है . इस बार के घोटालो ने   दलीय  सीमा को तोड़ दिया है  जो की हमारी नेताओं की एकता  को दिखता है,  facebook

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