इस बार का गणतंत्र दिवस हर मायने में कुछ खास है , जनता के सवालो का देश के रहनुमाओ के पास कोई जवाब नहीं है, चाहे वह सवाल प्याज की असमान छूती कीमतों के बरो में हो , या फिर घोटालो के बरो में हो , या फिर देश के द्वारा अर्जित की गयी उपलब्धियों के बारो में हो, एक ही चीज सबो में में सामान है और वो है सबका बढ़ना .
हमारा देश सही मायनो में विरोधाभासो का देश है ये इसी बात से जाहिर होती है की १ लाख ७६ हज़ार के घोटालो के बावजूद हम विश्व की छठी सबसे तेज प्रगति करने वाला देश है . अब आंकड़ो के खेल को समझे , देश की जीडीपी विकास की दर ८.९% जबकि प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ४४७०० सालाना है, बेरोजगारी के बारे बात करना तो समय की ही बर्बादी है . इस बार के घोटालो ने दलीय सीमा को तोड़ दिया है जो की हमारी नेताओं की एकता को दिखता है,
हमारा देश सही मायनो में विरोधाभासो का देश है ये इसी बात से जाहिर होती है की १ लाख ७६ हज़ार के घोटालो के बावजूद हम विश्व की छठी सबसे तेज प्रगति करने वाला देश है . अब आंकड़ो के खेल को समझे , देश की जीडीपी विकास की दर ८.९% जबकि प्रति व्यक्ति आय सिर्फ ४४७०० सालाना है, बेरोजगारी के बारे बात करना तो समय की ही बर्बादी है . इस बार के घोटालो ने दलीय सीमा को तोड़ दिया है जो की हमारी नेताओं की एकता को दिखता है,
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