Monday, October 3, 2011

ek nayi zindagi

 एक कहावत है  ज़िन्दगी सबकुछ सिखा देती है  , इस बात को तो काफी पहले समझ चूका था  अब महसूस भी करने लगा हु  . एक बात तो साबित हो गयी की किस्मत को बदला तो जा सकता है लेकिन लड़ा नहीं जा सकता .दोस्तों में जहा पदस्थापित हूँ , वहा एक नदी बहती हैं जिसका नाम  चुरनी  हैं , इसके इस किनारे पर में हूँ  और उस किनारे पर बंगलादेश , . खास बात ये हैं की मछुआरे  झींग मछली पकड़ने  उस किनारे  बंगलादेश जाते हैं और वहा के मछुआरे  हिलसा और बड़ी मछलियाँ पकड़ने इस किनारे आते हैं . शायद  बड़े बड़े मीटिंग्स में होने वाले शांति वार्ता से  ज्यादा बड़ा कम ये मछुआरे ही करते है .
                                           नवरात्री की विशेष शुम्कामना के साथ  आपका रोहित

Wednesday, January 26, 2011

vijay rath

इस बार का गणतंत्र  दिवस  हर मायने में कुछ खास है  ,   जनता के सवालो का  देश के रहनुमाओ  के पास कोई जवाब नहीं है, चाहे  वह सवाल प्याज की  असमान छूती कीमतों के बरो में हो , या फिर  घोटालो के बरो में हो , या फिर देश के द्वारा अर्जित की गयी उपलब्धियों के बारो में हो, एक ही चीज  सबो में में सामान   है  और  वो है  सबका बढ़ना .
                                   हमारा देश  सही मायनो में विरोधाभासो का देश है ये इसी बात से जाहिर होती है की  १ लाख ७६ हज़ार के घोटालो के बावजूद  हम विश्व की  छठी सबसे  तेज प्रगति  करने वाला देश है .  अब  आंकड़ो  के खेल को समझे , देश की जीडीपी  विकास की दर ८.९%  जबकि  प्रति व्यक्ति आय  सिर्फ ४४७०० सालाना है, बेरोजगारी के बारे  बात करना  तो समय की ही बर्बादी है . इस बार के घोटालो ने   दलीय  सीमा को तोड़ दिया है  जो की हमारी नेताओं की एकता  को दिखता है,  facebook

vijay rath

इस बार का गणतंत्र  दिवस  हर मायने में कुछ खास है  ,   जनता के सवालो का  देश के रहनुमाओ  के पास कोई जवाब नहीं है, चाहे  वह सवाल प्याज की  असमान छूती कीमतों के बरो में हो , या फिर  घोटालो के बरो में हो , या फिर देश के द्वारा अर्जित की गयी उपलब्धियों के बारो में हो, एक ही चीज  सबो में में सामान   है  और  वो है  सबका बढ़ना .
                                   हमारा देश  सही मायनो में विरोधाभासो का देश है ये इसी बात से जाहिर होती है की  १ लाख ७६ हज़ार के घोटालो के बावजूद  हम विश्व की  छठी सबसे  तेज प्रगति  करने वाला देश है .  अब  आंकड़ो  के खेल को समझे , देश की जीडीपी  विकास की दर ८.९%  जबकि  प्रति व्यक्ति आय  सिर्फ ४४७०० सालाना है, बेरोजगारी के बारे  बात करना  तो समय की ही बर्बादी है . इस बार के घोटालो ने   दलीय  सीमा को तोड़ दिया है  जो की हमारी नेताओं की एकता  को दिखता है,